वैज्ञानिक माइक्रोब की शक्ति को स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्राप्त करने का सतत् प्रयास करते रहे हैं एरीज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी (Arizona State University) के बायोडिज़ाइन इंस्टीट्यूट (Biodesign Institute) के शोधकर्ता डॉ. प्रताप परमेश्वरन और उनके सहयोगियों ने विशेष बैक्टीरिया के प्रयोग द्वारा स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन की क्षमता को बढ़ाने की विधि खोज निकाली है।
माइक्रोबियल इलेक्ट्रोकेमिकल सेलस् (Microbial electrochemical cells) या MXCs बैक्टीरियल श्वसन क्रिया का प्रयोग करके इलेक्ट्रॉन मुक्त करा सकते हैं, जिसके द्वारा धारा (current) पैदा की जा सकती है और स्वच्छ विद्युत बनायी जा सकती है। छोटा सा बदलाव करके इस युक्ति (device) से इलेक्ट्रिलिसिस किया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक विधि से हाइड्रोजन (hydrogen) उत्पन्न होती है, इस कारण जीवाश्म ईंधन और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम हो सकती है, जो कि आजकल हाइड्रोजन उत्पादकों द्वारा सर्वाधिक प्रयोग में लाये जाते हैं।
MXCs बैटरी की भाँति होते हैं, इसमें प्रत्येक टर्मिनल के लिए एक मेसॉन जार के आकार का चैम्बर (Mason jar-sized chamber) लगाया जाता है। बैक्टीरिया धनात्मक चैम्बर में बढ़ते हैं, जिसे एनोड (anode) कहते हैं। सेंटर फॉर इंवायर्नमंटल बायोटेक्नोलॉजी (Center for Environmental Biotechnology) के निर्देशक ब्रूश रिटमैन (Bruce Rittmann) और उनके सहयोगियों ने यह पहले भी दर्शाया है कि बैक्टीरिया एनोड इलेक्ट्रोड (anode electrode) पर जी और फलफूल सकते हैं और व्यर्ज (waste) पदार्थ को भोजन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, (बैक्टीरिया के कच्चा भोज्य पदार्थ में सुअर खाद (pig manure) और अन्य खेत व्यर्ज भी सम्मिलित हैं), इनके बढ़ने के लिए जब इलेक्ट्रोड पर इलेक्ट्रॉन भेजे जा रहे हों की क्रिया से विद्युत बनती है।
एक माइक्रोबियल इलेक्ट्रोलिसस सेल (microbial electrolysis cell, MEC) में, एनोड पर उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रॉन धनावेशित प्रोटान से जुड़कर ऋणात्मक कैथोड (cathode) चैम्बर में हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। परमेश्वरन का कहना है कि “MEC एनोड पर होने वाली प्रतिक्रिया (रासायनिक और भौतिक) माइक्रोबियल सेल की भाँति ही है जिससे विद्युत उत्पादन किया जाता है।” हम इस युक्ति को किस प्रकार उपयोग करते हैं अंति उत्पाद इसी बात पर निर्भर करता है।
जब बैक्टीरिया आक्सीजन मुक्त या ऐनार्बिक परिवेश (anaerobic environment) में बढ़ती है, तो MXC के एनोड पर जमा हो जाती है और शर्करा और प्रोटीन की स्टिकी मैट्रिक्स् (sticky matrix) बनाती है। ऐसे परिवेश में, जब रासानिक यैगिकों (organic compounds) पर पाली जाती है, तो बैक्टीरिया की एक कुशल भागीदारी बायोफ़िल्म एनोड पर स्थापित हो जाती है, जिसमें फ़र्मेन्टरस् (fermenters), हाइड्रोजन स्कैविंजरस् (hydrogen scavengers), और एनोड पर साँस लेने वाले बैक्टीरिया (anode respiring bacteria, ARB) होते हैं। यह जीवित मैट्रिक्स बायोफ़िल्म एनोड के रूप में जानी जाती है, यह एक बढ़िया विद्युत चालक (strong conductor) होती है, जो कि एनोड पर इलेक्ट्रॉन कुशलतापूर्वक भेजने में समर्थ है जहाँ पर ये कैथोड की दिशा के आर-पार (across to the cathode side) एक करंट ग्रेडियंट (current gradient) का अनुगमन करते हैं।
वर्तमान अध्ययन दर्शाता है कि एनोड चैम्बर में होमो-ऐसेटोजेनस् (homo-acetogens) नामक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने से ऐनोड से कैथोड की ओर जाने वाले इलेक्ट्रॉन का बहाव स्तर बढ़ाया जा सकता है। होमो-ऐसेटोजेनस् व्यर्ज पदार्थ में हाइड्रोजन से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, एसीटेट (acetate) बनाते हैं, जो एनोड बैक्टीरिया के लिए एक बहुत अनुकूल इलेक्ट्रॉन दाता है।
अध्य्यन दर्शाता है कि अनुकूल परिस्थितियों में एनोड बैक्टीरिया होमो-ऐसेटोजेनस् के साथ सिनट्रोफी (syntrophy) या पारास्परिक क्रिया के पश्चात् अधिक कुशलता के साथ हाइड्रोजन को विद्युत धारा में बदल सकते हैं। यह टीम अन्य हाइड्रोजन ग्राही माइक्रोबस् के विपरीत प्रभावों को कम करने में भी समर्थ रही है, उदाहरण के लिए मीथेन बनाने वाली मीथेनोजेनस् (methanogens) , जो प्रणाली में उपस्थित कुछ इलेक्ट्रॉन चुरा लेता है, जिससे विद्युत धारा कम हो जाती है। मीथेनोजेन का चयनात्मक अवरोध 2-ब्रोमोएथेन सफ़ोनिक अम्ल (2-bromoethane sulfonic acid) को एनोड के माइक्रोबियल स्ट्यू (microbial stew) में मिला देने से प्राप्त होता है।
होमो-ऐसेटोजेनस् की पहचान की पुष्टि करने के लिए समूह रासायनिक और जेनोमिक (genomic) दोनों विधियों का प्रयोग करता है। साथ ही साथ एसीटेट की खोज पर, फारमेट, एक मध्यस्थ उत्पाद भी खोजा गया है। मात्रात्मक PCR विश्लेषण की सहायता से, टीम FTHFS के रूप में एसीटोजेन के जेनोमिक सिंगनेचर (genomic signature) को भी ढूँढ़ने में सफल रही है, FTHFS एक जीन है जो एसीटोजेनेसिस (acetogenesis) से सम्बंधित है।
परमेश्वरन ने कहा कि हमने यह भी स्थापित किया है कि यह होमो-ऐसेटोजेनस् प्रबल हो सकते है और सम्बंध बना सकते हैं। आगे किया जाने वाला शोध से यह पता चलेगा कि रासायनिक निष्क्रियकों की अनुपस्थिति में होमो-ऐसेटोजेनस् और एनोड बैक्टीरिया के बीच सिनट्रोफिक संबंध बनाए रखे जायें।
आगे की प्रगति बड़े पैमाने पर प्रणाली के व्यवसायीकरण के मार्ग प्रशस्त करेगी जिससे गंदे पानी का शुद्धिकरण और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन दोनों कार्य साथ-साथ हो जाया करेंगे। सेसर टोरएस (Cesar Torres) का कहना है कि अभी तक की सबसे बड़ी रुकावट इस क्षेत्र में हमारा कम ज्ञान है। सेसर टोरएस वर्तमान अध्य्यन के सह लेखक हैं जो इस बात पर बल देते हैं कि MXCs के अंदर बैक्टीरिया समूहों की पारस्परिक क्रियाओं के बारें अभी बहुत कुछ जानना शेष है।
यह क्षेत्र बहुत नया है, टोरएस इंगित करते हैं, MXCs पर कार्य पिछले कुछ 8 वर्षों से ही हो रहा है। आगे आने वाले 5-10 वर्षों में समूह और बहुत कुछ नयी जानकारी एकत्र कर पायेगा जो कि बहुत उपयोगी होगी और हम एक श्रेष्ठ उपकरण बना पायेंगे।
टीम के परिणाम आनलाइन पत्रिका बायोरिसोर्स टेक्नॉजी (Bioresource Technology) में देखे जा सकते हैं।
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Story by विनय प्रजापति
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