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नया शोध ब्लैक होल हरे होते हैं: नासा (NASA)

Astronomy

नासा (NASA) की चन्द्र एक्स-रे प्रयोगशाला (Chandra X-ray Observatory) के द्वारा किये गये नये अध्ययन से पता चला है कि कृष्ण छिद्र या ब्लैक होल ब्रह्माण्ड के सर्वाधिक ईंधन कुशल इंजन हैं। हरे कृष्ण छिद्र कितने कुशल हैं, इस बात के प्रत्यक्ष आँकलन के द्वारा यह अंतर्दृष्ट हो जाता है कि काले कृष्ण छिद्र कैसे ऊर्जा उत्पन्न करते हैं और उनसे अनका वातावरण कैसे प्रभावित होता है।

X-ray-Radio-Infrared-Image-of-NGC-4696

X-ray, Radio, Infrared Image of NGC 4696. (Credit: X-ray: NASA/CXC/KIPAC/S.Allen et al; Radio: NRAO/VLA/G.Taylor; Infrared: NASA/ESA/McMaster Univ./W.Harris)

चन्द्र की नयी खोज से यह पता चलता है कि महापरिमाण (supermassive) वाले कृष्ण छिद्र की ओर गिरते पदार्थ के द्वारा अधिकांश मुक्त की गयी ऊर्जा कृष्ण छिद्र से दूर जाती लगभग प्रकाश की गति से चल रही उच्च ऊर्जा धाराओं (jets) के रूप में होती है। इस बात को समझने का एक महत्वपूर्ण चरण है कि ऐसी धाराएँ कैसे कृष्ण छिद्र के घटना क्षितिज के पास गैस की चुम्बकीय डिस्क (magnetized disks) से प्रारम्भ की जा सकती हैं।

मुख्य लेखक स्टीव एलेन (Steve Allen, Kavli Institute for Particle Astrophysics and Cosmology at Stanford University, and Stanford Linear Accelerator Center) कहते हैं कि किसी वाहन जैसे कार की भाँति कृष्ण छिद्र की ईंधन कुशलता को समझना महत्वपूर्ण है। इस जानकारी के बिना हम यह पता नहीं कर सकते की ढकने  (hood) के नीचे क्या चल रहा है, तो आइए बात करते हैं कि इंजन क्या कर सकते हैं।

एलेन और उनकी मंडली ने चन्द्र का प्रयोग करके अण्डाकार मंदाकिनियों (elliptical galaxies) के केन्द्र पर नौ (9) महापरिमाण वाले कृष्ण छिद्रों का अध्ययन किया है।

यह कृष्ण छिद्र क्वासर (quasar) की अपेक्षाकृत पुराने हैं और बहुत कम विकिरण पैदा करते हैं, तीव्रता से बढ़ते महापरिमाण वाले कृष्ण छिद्रों को बहुत पहले ब्रह्माण्ड में देखा गया था। आश्चर्य हुआ जब चन्द्र के परिणामों ने दिखाया कि ये सभी “शांत” कृष्ण छिद्र उच्च-ऊर्जा कणों की धाराओं में अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, यह दृश्य प्रकाश या एक्स-रे से भी अधिक होती है। ये धाराएँ मंदाकिनी के भीतर गर्म गैस में विशालकाय बुलबुले या गड्ढे (cavities) बनाती हैं।

निम्न दो चरणों में ऊर्जा पैदा करने वाले कृष्ण छिद्र की कुशलता की गणना की जा सकती है: प्रथम, मंदाकिनी के भीतरी क्षेत्रों के चित्रों का प्रयोग करके यह आँकलन करते हैं कि कृष्ण छिद्र के लिए कितना ईंधन शेष है; द्वितीय, इन्हीं चित्रों का प्रयोग करके यह गणना की जाती है कि गड्ढे पैदा करने के लिए कितनी शक्ति की आवश्यकता पड़ेगी।

सह-लेखक क्रिस्टोफ़र रेनॉल्डस (Christopher Reynolds, University of Maryland, College Park) ने कहा “यदि एक कार इन्ही कृष्ण छिद्रों की भाँति ईंधन कुशल थी, तो इसे सैद्धांतिक रूप से गैस के एक गैलेन में एक अरब मील की दूरी तय करना चाहिए था।”

नयी जानकारियाँ दी गयीं हैं कि कैसे कृष्ण छिद्र इंजन इतनी चरम कुशलता प्राप्त करते हैं। थोड़ी-सी गैस पहले कृष्ण छिद्रों को आकर्षित करती है, जो कि बाद मे कृष्ण छिद्र के बहुत पास पहुँचने से पूर्व ही ऊर्जावान गतिविधि द्वारा दूर बहा दी जाती है। किन्तु एक महत्वपूर्ण अंश अंतत: घटना क्षितिज पर पहुँच जाता है जहाँ पर यह उच्च क्षमता के साथ धाराओं को शक्तिवान कर देता है। अध्ययन से यह भी संकेत मिलता है कि पदार्थ कई लाख वर्ष तक एक स्थिर दर से कृष्ण छिद्रों की ओर बहता है।

एलेन, जो Office of Science of the Department of Energy से अनुदान प्राप्त कर रहे हैं, बताते हैं कि “ये कृष्ण छिद्र बहुत ही कुशल हैं, किन्तु ये स्वयं के लिए पुन: ईंधन जमा करने में बहुत लम्बा समय लेते हैं।”

यह नया अध्ययन दर्शाता है कि कृष्ण छिद्र एक अन्य महत्वपूर्ण रूप से हरे हैं। धाराओं द्वारा गर्म गैस को स्थानांतरित ऊर्जा इसे ठण्डा होने से बचाती है, इस प्रकार लाखों नये नक्षत्रों का जन्म नहीं होता है। यह बड़ी-बड़ी मंदाकनियों के वृद्धि को सीमित कर देती है और मंदाकिनीय विस्तार को रोककर उन्हें पड़ोसी से जुड़ने (भिड़ने) नहीं देती है।

ये परिणाम Royal Astronomical Society के मासिक सूचनाओं के अगले अंकों में प्रकट (appear) होंगे। NASA का Marshall Space Flight Center, Huntsville, Ala. ‘Science Mission Directorate’ के अभिकरण (agency) के लिए चन्द्र कार्यक्रम का प्रबंधन करता है। Smithsonian Astrophysical Observatory चन्द्र एक्स-रे केन्द्र (Chandra X-ray Center, Cambridge, Mass. ) से विज्ञान और उड़ान संचालन करती है।

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9 Comments

  1. master ram (Reply) on June 7th, 2010 at 3:42 am

    nice journal

     
  2. sadhak ummedsingh baid (Reply) on April 16th, 2010 at 5:23 pm

    bat jami nahin. energy ka blackhole se sambandh nahin hai. vijyan bhatak raha hai. samay hone se is vishay par likhane ka man hai.

     
  3. drshyam gupta (Reply) on March 28th, 2010 at 1:44 pm

    जब रन्ग -सूर्य के प्रकाश(-प्रकाश) से संबधित हैं—-तो क्रष्ण विवर हरे कैसे हो सकते हैं, इसे कैसे व्याख्यायित करेंगे ,क्या वहां भी प्रकाश होता है?

     
    • विनय प्रजापति (Reply) on March 28th, 2010 at 3:15 pm

      मैं आपके प्रश्न का उत्तर खोजने की पूर्ण कोशिश करूँगा!

       
  4. RAJNISH PARIHAR (Reply) on March 27th, 2010 at 7:42 pm

    विज्ञानं के क्षेत्र में ये एक महत्वपूरण खोज है..!अच्छी जानकारी दी आपने!!!

     
  5. [...] This post was mentioned on Twitter by alka sarwat mishra, Vinay Prajapati. Vinay Prajapati said: RT @vinayprajapati नया शोध ब्लैक होल हरे होते हैं: नासा (NASA) http://digg.com/u1Rohx [...]

     
  6. alka sarwat mishra (Reply) on March 27th, 2010 at 5:49 pm

    बिलकुल नयी जानकारी हमें पहुंचाई आपने ,साधुवाद,

    आज अर्थ आवर के दिन ये जानकारी प्रासंगिक है

    अगर इसकी थ्योरी समझ में आ जाये तो ऊर्जा की कोई कमी न हो धरती पे

     
  7. Prabhat (Reply) on March 27th, 2010 at 5:40 pm

    Cool Article. Do you have some links related with this article.

     
  8. Zeashan Zaidi (Reply) on March 27th, 2010 at 2:06 pm

    Nice Information

     

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