प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए सिलिकॉन की अपेक्षा कार्बन नैनो-ट्यूब का प्रयोग एक उन्नत विकल्प के रूप में सामने आया है। जिससे कैलक्यूलेटर और आपकी छतों पर लगने वाले सौर ऊर्जा (solar energy) एकत्र करने वाले यंत्रों में आपेक्षिक सुधार होगा।
Cornell के शोधकर्ताओं ने फ़ोटोडायोड कहे जाने वाले सरल सौर सेल को निर्मित किया है। परीक्षण द्वारा उनकी कार्य-प्रणाली को पूर्णरूप से सुनिश्चित किया गया है। यह फ़ोटोडायोड एक कार्बन नैनोट्यूब (carbon nanotube) से बना है।
इस शोध समूह के प्रमुख सदस्य Paul McEuen (भौतिकी के प्राध्यापक), और Jiwoong Park (रसायनशास्त्र और रसायनिक जीव विज्ञान के सहायक प्राध्यापक) हैं। इस शोध में यह दर्शाया गया है यह नयी फ़ोटोडायोड किस प्रकार प्रकाश को विद्युत में प्रभावशाली प्रकिया द्वारा बदल देती है और बहने वाली विद्युत धारा (electrical current) में कई गुना वृद्धि हो जाती है। यह शोध अगली पीढ़ी के उच्च क्षमता सौर सेल का पहला चरण है।
Nathan Gabor(McEuen’s lab के स्नातक छात्र) का कहना है कि हम मात्र एक नये पदार्थ की खोज ही नहीं कर रहे हैं, हम इसका प्रयोग करके एक सच्ची सौर सेल युक्ति (device) को निर्मित कर रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने इस सौर सेल सिंगल-वॉलड कार्बन नैनोट्यूब (single-walled carbon nanotube) का प्रयोग किया है जो मूलत: एक graphene की बेलनाकार चादर (rolled-up sheet) है। लगभग डी.एन.ए. (DNA) अणु के बराबर आकार वाली नैनोट्यूब को दो विद्युत संपर्कों (electrical contacts) के मध्य तार द्वारा जोड़ा गया है जो दो विद्युत गेटस् (electrical gates) पर बंद होती है जिसमें से एक ऋण (negatively) और दूसरा धनावेशित (positively charged) है। यह शोध एक पुराने शोध से प्रभावित होकर शुरु किया गया है जिसमें वैज्ञानिकों ने सिंगल-वॉलड नैनोट्यूब का प्रयोग करके एक डायोड बनाया था जो एक सरल ट्रांजिस्टर (transistor) है और विद्युत धारा को केवल एक दिशा में बहने देता है। Cornell का शोध समूह यह जाँचना चाहता था कि क्या होता है जब यह प्रकाश के संपर्क में आती है।
नैनोट्यूब के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग रंग की लेज़र (laser) चमकाने पर यह पाया कि फ़ोटॉन ऊर्जा (photon energy) के उच्च स्तर पर उत्पन्न होने वाली विद्युत धारा के गुणक प्रभाव (multiplying effect) पड़ता है, अर्थात् विद्युत धारा में बढ़ोत्तरी होती है।
शोध के समय यह बात भी सामने आयी कि पतली बेलनाकार आकृति वाली कार्बन नैनोट्यूब इलेक्ट्रॉनस् (electrons) को एक-एक करके जाने देती है। नैनोट्यूब में चलने वाले इलेक्ट्रॉनस् उत्तेजित होकर नये इलेक्ट्रॉनस् को उत्पन्न करते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। यह नैनोट्यूब एक आदर्श फ़ोटो सेल (Ideal Photocell) हो सकती है क्योंकि यह प्रकाश की उपस्तिथि में इलेक्ट्रॉनस् को नये इलेक्ट्रॉनस् बनाने देती है।
यह आज उपयोग किये जा रहे सौर सेल से बिल्कुल ही भिन्न है जिसमें अधिकांश ऊर्जा ऊष्मा (heat) में रूप में क्षय (lost) हो जाती है और वातावरणीय तापमान को एक समान बनाये रखने की आवश्यकता रहती है।
Gabor का मानना है कि जो युक्ति (device) बनायी गयी है उसे सस्ता और विश्वसनीय (reliable) बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
यह शोध Cornell’s Center for Nanoscale Systems और Cornell NanoScale Science and Technology जो कि National Science Foundation से जुड़े हैं, के सहयोग से किया गया है। साथ-साथ Microelectronics Advanced Research Corporation का भी सहयोग रहा है जो कि Materials, Structures and Devices पर ध्यान केंद्रित रखता है। इस शोध में Zhaohui Zhong (University of Michigan) और Ken Bosnick (National Institute for Nanotechnology at University of Alberta) का महत्वपूर्ण योगदान है।
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Story by विनय प्रजापति
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जानकारी का आभार.
अच्छा लगा, व्यस्तता में हूँ, पुनः देखूँगा…. साधक
NICE POST VINAY
इस ब्लॉग को देखकर अति प्रसन्नता हुई, आगे भी आना बना रहेगा।
अनेकानेक शुभेक्षाएँ
great news,
बहुत अच्छी ख़बर है
surprised with the article… nice
यह बहुत अच्छी बात है, शुक्रिया इस ख़बर के लिए!
बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की आपने.
आभार्!
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है आभार