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ब्रह्माण्ड के प्रचीनतम् सुपरनोवा की खोज

Astronomy, Discovery

तारों के विस्फोट अवशेषों के चित्रों पर बीते वर्षों की गहन अध्ययन और आकाशगंगाओं (galaxies) की खोज प्रकिया के दौरान लगभग 11 अरब प्रकाश वर्ष (light year) की दूरी पर स्थित सुपरनोवा (supernovae) की खोज की गयी है जो कि अब तक पृथ्वी से सबसे दूर स्थित सुपरनोवा है।

University of california के खगोल शास्त्री Jeff Cooke और उनके सहयोगियों ने जिस सुपरनोवा की खोज की है वह एक प्रकाशस्तम्भ (beacon) साबित हो सकता है क्योंकि सुपरनोवा अत्यधिक प्रकाश के साथ विस्फोटित होता है और उन गैस के गोलों को भी प्रकाशमान करता है जिन्हें वह अपनी हिंसक मृत्यु से पूर्व घेरा (shedding) देता था| यह वह गैस के घेरे हैं जो किसी तारे के चारों ओर उपस्थित रहते हैं।

जब एक तारा विस्फोट करता है तो उत्सर्जित पदार्थ आस-पास उपस्थित गैस के घेरों के साथ भिड़ता है जिससे वे प्रकाशमान हो जाते हैं। किसी सुपरनोवा के विस्फोट का समय बहुत कम होता है, जबकि गैस के घेरों से प्रकाश कई वर्षों तक उत्सर्जित होता रहता है।

supernovaउपरोक्त तथ्य से Cooke और उनके सहयोगियों को इस खोज के सत्यापन का अवसर मिला, जिसके चित्र ‘Canada-France-Hawaii Legacy Survey’ से लिए गये थे। इस खोज समूह ने 60,000 आकाशगंगाओं का चुनाव किया और लगभग दैनिक परीक्षणों के छ: महीनों के दौरान जमा किए गये प्रकाश को संयुक्त किया, तत्पश्चात इस परिणाम की तुलना उन्होंने एक अन्य वर्ष के छ: महीनों में किए गये परीक्षणों से की।

चार लक्ष्यों ने अधिक समय का प्रकाश उत्सर्जन (over time brightening) दर्शाया, सम्भवत: ऐसा सुपरनोवा विस्फोट के कारण हुआ है। तब Jeff Cooke ने शेष चमकदार घेरों के सत्यापन के लिए Keck Telescope का प्रयोग किया।

Cooke ने चित्रों पर और अधिक गहन जाँच जारी रखने की योजना बनायी है, वे अभी चित्र जमा करने की प्रकिया के 1/5 भाग में हैं, जिससे किसी अन्य बहुत दूर स्थित सुपरनोवा की खोज की जा सके। अंतत:, और भी अधिक शक्तिशाली दूरबीन के साथ, वे आशा करते हैं कि विस्फोट अवशेषों के रासायनिक अंगुलांक ( chemical fingerprints) प्राप्त कर पायेंगे। जिससे यह ज्ञात हो सकेगा कि नयी युवा आकाशगंगाओं (very young galaxies) में बनने वाले तारे अगली पीढ़ी (later-generation galaxies) की आकाशगंगाओं में जन्में तारों से अलग पदार्थ से बने थे।

खगोल शास्त्री ऐसा मानते हैं कि भारी तत्व तारों में बने और आकाश में उनके बिखराव ने भविष्य की आकाशगंगाओं के लिए कच्चे पदार्थ का काम किया।

University of Toronto से जुड़े Ray Carlberg इस विषय पर कहते हैं कि ‘हमें करने में सक्षम होना चाहिए जब सुपरनोवा बहुत अधिक प्रकाशमान हो और धातु साम्रगी की माप की जा सके।

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Story by विनय प्रजापति

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15 Comments

  1. sadhak ummed singh baid (Reply) on December 11th, 2009 at 11:16 am

    अब कैसे कहूँ…. इस तरह तो विज्ञान और सौ साल तक खगोल के रहस्यों को नहीं जान सकेगा. जब रास्ता ही गलत हो तो मंजिल की क्या चर्चा करना. मुश्किल यह है कि सत्य विज्ञान की प्रओगशाला की वस्तु नहीं, मानव के जीने की वस्तु है, और विज्ञान सिर्फ़ शरीर की परिक्रमा लगा रहा है. वह इस आशामें है कि यह परिक्रमा कभी नी कभी प्रकृति के गहरे रहस्यों को खोल देगी…. यह मोह है. अब देखिये! मोह तो दर्शन का शब्द है, विज्ञान का विद्यार्थी इसे पढते ही नाक-भौं सिकोङ लेगा… क्या करें!

     
  2. aditi (Reply) on September 19th, 2009 at 11:11 pm

    amazing, this blog is really nice ;)

     
  3. joan parker (Reply) on July 24th, 2009 at 5:28 am

    Thanks for posting about this, I would love to read more about this topic.

     
  4. sbai (Reply) on July 20th, 2009 at 2:07 pm

    Jaankari ke liye AABHAAR.

     
  5. Syed Akbar (Reply) on July 19th, 2009 at 1:26 pm

    बढिया जानकारी !

     
  6. ali syed (Reply) on July 18th, 2009 at 10:38 pm

    Nice post

     
  7. Dilip kawathekar (Reply) on July 18th, 2009 at 6:56 pm

    बढिया जानकारी!! कमाल करते हैं आप….

     
  8. Abhishek Mishra (Reply) on July 18th, 2009 at 5:03 pm

    महत्वपूर्ण जानकारी.

     
  9. Swapna Manjusha 'ada' (Reply) on July 18th, 2009 at 4:50 pm

    बहुत ही अच्छी जाकारी दी आपने..
    अजी, इसे कहते हैं ‘चिराग तले अँधेरा’, जब समीर जी को नहीं मालूम, तो मैं तो ३५० किलो मीटर दूर हूँ उनके शहर से….
    बस यही कहना है आप विज्ञानं सम्बन्धी जानकारियाँ चुन-चुन कर लाते हैं, और हमारा ज्ञान बढ़ाते हैं..
    धन्यवाद…

     
  10. RENU (Reply) on July 18th, 2009 at 3:00 pm

    bahut achchi jaankaari di …dhanywad

     
  11. प्रियंका (Reply) on July 18th, 2009 at 9:59 am

    आपके ब्लॉग पर बहुत रोचक पोस्टें पढ़ने को मिलीं

    धन्यवाद।

     
  12. इस महत्वपूर्ण सूचना के लिए,
    आपका आभार !

     
  13. Himanshu (Reply) on July 18th, 2009 at 8:17 am

    महत्वपूर्ण सूचना व ज्ञानवर्धन । आभार ।

     
  14. आभार जानकारी का..हमारे शहर की यूनिवर्सिटी और हमें भनक तक न थी..आप का साधुवाद!!!

     
  15. Arvind Mishra (Reply) on July 18th, 2009 at 6:34 am

    अच्छा लिखा है विनय भाई आपने

     

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