290 लाख प्रकाशवर्ष दूर स्थित गैलेक्सी में उपस्थित आश्चर्यजनक रूप से चमकीला पिण्ड एक नये प्रकार का ब्लैक होल (कृष्ण छिद्र) हो सकता है।
वैज्ञानिक यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं कि मध्यवर्ती द्रव्यमान वाले कृष्ण छिद्र वास्तव में उपस्थित हैं, ऐसे कृष्ण छिद्र हल्के होते हैं और कम प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। एक बिल्कुल नया पिण्ड dubbed HLX-1 इस प्रकार के कृष्ण छिद्रों का एक बढ़िया विकल्प है।
अभी खगोलशास्त्री मानते हैं कि दो प्रकार के कृष्ण छिद्र पाये जाते हैं।
एक ऐसे जिन्हें छोटा होने के कारण तारकीय द्रव्यमान (stellar-mass) कृष्ण छिद्र कहा जाता है, ये समाप्त होते तारों से बनते हैं और इनका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 20-30 गुना होता है। दूसरे वे होते हैं जिन्हें अति तारकीय द्रव्यमान (supermassive) वाले कृष्ण छिद्र कहा जाता है, यह अधिकांशत: आकाशगंगा (galaxy) के मध्य में उपस्थित होते हैं और इनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से लाखों-करोड़ों गुना अधिक होता है।
Philip Kaaret, Astrophysicist, University of lowa, ने कहा है कि प्रकृति इतने भारी भरकम कृष्ण छिद्र बनाती है, तारे से कृष्ण छिद्र बनने में लगने वाला समय बहुत लम्बा है अर्थात् इस अंतराल में क्या होता है हमें बहुत कम पता है।
नया कृष्ण छिद्र “ठीक है?”
सभी कृष्ण छिद्र अपने आस-पास उपस्थित द्रव्य को स्वयं में समाहित करते हुए बढ़ते हैं। यह दिखते हैं क्योंकि इसमें समाहित होता द्रव्य सिकुड़ते हुए और भी अधिक गर्म और प्रकाश उत्सर्जित करने वाला हो जाता है।
कृष्ण छिद्र में द्रव्य के समाहित होने की एक निश्चित सीमा है। जब कृष्ण छिद्र के गुरुत्व (gravity) का खिंचाव (pull) समाहित हो रहे द्रव्यमान के विकिरण (radiation) के दबाव (push) के समान मान का हो जाता है तो इस बिन्दु पर कृष्ण छिद्र में कोई द्रव्यमान समाहित नहीं होता है।
अत: स्पष्ट हो जाता है कि एक कृष्ण छिद्र कितना प्रकाश उत्सर्जित कर सकता है इसकी एक निश्चित सीमा है।
सैद्धांतिक रूप से, एक मध्यवर्ती भार वाले कृष्ण छिद्र globular clusters कहलाने वाले बूढ़े तारों के घने समूहों के भीतर बन सकते हैं। फ्रांस में Centre d’Etude Spatiale des Rayonnements के खगोलशास्त्री Natalie Webb द्वारा किये गये अध्य्यन ने यह स्पष्ट किया है।
ऐसे clusters में, एक stellar-mass कृष्ण छिद्र मध्यवर्ती भार वाले कृष्ण छिद्र में परिवर्तित हो सकता है क्योंकि आस-पास उपस्थित गैसों और धूल कणों के आपसी खिंचाव के कारण ये आपस में टकराते और विलय (collide and merge) हो जाते हैं।
University of Iowa के Kaaret भी विचार है कि प्रारम्भिक ब्रह्माण्ड की गैस युक्त गहराई (gas-rich depths) में मध्यवर्ती भार वाले कृष्ण छिद्रों का विकास हुआ होगा, जब सितारे आधुनिक नक्षत्रों की तुलना में अधिक द्रव्यमान प्राप्त कर सकते थे।
पूर्वावलोकन द्वारा प्राप्त पिण्ड stellar-mass कृष्ण छिद्रों की अपेक्षा अधिक प्रकाशमान हैं। अन्य गुणों को ध्यान में रखते हुए प्रकाश की तीव्रता यह बताती है कि ऐसे पिण्ड ब्लैक होल के विकास के मध्य चरण में हैं।
सिद्ध करने में कठिनाई:
HLX-1 एक ऐसा ही पिण्ड है जो कि x-rays में बहुत अधिक प्रकाशमान है। खगोलशास्त्री मानते हैं कि यह सूर्य से 500 गुना अधिक द्रव्यमान वाला हो सकता है।
Sean Farrell जो कि इस अध्ययन के प्रमुख हैं, का कहना है कि यह पिण्ड पिछले सभी देखे गये मध्यवर्ती भार वाले पिण्डों की अपेक्षा 10 गुना अधिक प्रकाशमान है।
लेकिन किसी भी ज्ञात पिण्ड की पुष्टि करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। Kaaret ने कहा कि आपको साथी नक्षत्र (companion star) को देखना होगा जो कि ब्लैक होल की चमक और उसकी धरती से दूरी को बड़ी कठिनाई से बता पाएगा।
Olivier Godet (University of Leicester, U.K.) का कहना है कि आपको लौह उत्सर्जन (iron emission) भी देखना होगा जो कि कृष्ण छिद्र में समाहित द्रव्य की अव्यवस्थित (odd) गुरुत्व प्रभाव के द्वारा विकृत (distort) होता दिखायी देगा। किन्तु अभी ऐसे यंत्र इतने अच्छे नहीं हैं कि ऐसे उत्सर्जन को जाँच पायें।
अध्ययन प्रमुख Farrell ने कहा कि अगली पीढ़ी के यंत्र इतने सक्षम होंगे कि वे ऐसे पिण्डों से होने वाले विकृत लौह उत्सर्जन को खोज निकालेंगे और पराबैंगनी उत्सर्जन को भाँप पायेंगे।
हमारे लिए यह अगला चरण है, और तब तक के लिए यह विश्वसनीय लगता है।
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Story by विनय प्रजापति
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बिल्कुल नवीन एवं बढिया जानकारी प्रदान की आपने………
अच्छी जानकारी है.
Nai aur mahatwapurn jaankari di aapne.
gyanwardhak post shukriya…!
बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने धन्यवाद, जारी रखे
अच्छी जानकारी है, आभार। इसी प्रकार लगे रहें।
बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी.
शुक्रिया
बढ़िया व ज्ञानवर्धक जानकारी धन्यवाद !
adbhut jaankari!
मेरे लिए एकदम नई, अद्भुत और जरूरी जानकारी।
ज्ञानवर्धक जानकारी…..आभार.
कृष्ण विबरों /अंध कूपों के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी -शुक्रिया !
jankari achchi lagi