3-फुट लम्बा क्रेटेसियस (Cretaceous) डब्बे जैसी खोपड़ी और तोते जैसी चोंच वाले जबड़े रखता था जो कि आज के तोते से काफ़ी मिलता जुलता है। नये अध्ययन बताते हैं कि उसकी चोंच अख़रोट जैसे फल आसानी से तोड़ सकती थी।
110 लाख साल पुराने जीवाश्म के साथ कंकाल में 50 (पक्षियों के पेट में पाये जाने वाले) पत्थर मिले हैं शोधकर्ता बताते हैं कि यह अखरोट जैसे फल और बीज खाता था। पेट में पाये पत्थरों का प्रयोग चिड़ियाँ और अन्य पक्षी भोजन को पीसने में करते हैं क्योंकि उनके दाँत नहीं होते हैं।
यदि स्पष्ट हो गया तो, Psittacosaurus gobiensis (गोबी का रेंगने वाला तोता) और इसके नज़दीकि रिश्तेदार दुनिया के पहले अखरोट खाने वाले डायनासोर होंगे।
Paul Sereno, जो कि शिकागो यूनिवर्सिटी में एक Paleontologist हैं, बताते हैं कि डायनासोर क्या खाते थे इसका अध्ययन बहुत कठिन है।
आइए अब इस जीव के बारे में विस्तार से जानते हैं:
चीड़-फाड़ वाले जबड़े (Shearing Jaws):
यह खोपड़ी 2001 में मंगोलिया के गोबी रेगिस्तान में मिली थी। एक बार विशाल जबड़े की मांसपेशियाँ अत्यंत कठोर व्यापक चादरों जैसी गाल की हड्डियों से जुड़ी हैं जो इसे काटने के लिए बहुत शक्ति देती थीं।
तोते की तरह, यह डायनासोर भी अपने जबड़े उर्ध्व (vertically) और क्षैतिज (horizontally) घुमा सकता था जिससे इसको कड़े फलों और पत्तियों को चबाने में आसानी होती है।
Hans-Dieter Sues, जो National Museum of Natural History, Washington, D.C., में एक Paleontologist हैं, ने कहा है कि वैज्ञानिक आश्चर्य करते हैं क्यों यह डायनासोर और इसके रिश्तेदारों को, जिनके शक्तिशाली जबड़े और पेट में पत्थर थे, Psittacosarus कहा जाता है।
ऐसे जानवर जिनके पेट में पत्थर होते हैं उन्हें कठोर चोंच की आवश्यकता नहीं होती है। मुर्गी और उसके चूजे की चोंच कम कठोर होती है इस लिए वे खाने के साथ पत्थर के छोटे टुकड़े भी चुगते हैं ताकि बिना चबाये गये खाने को पेट में पीसा जा सके।
Sue ने कहा कि Sereno का वाक्य है: “बहुत सम्मोहक तर्क यह है कि [नया डायनासोर] असामान्य रूप से कठोर भोजन कर थे मुझे अच्छे-से समझ आता है।”
अजीब और सफल (Odd And Successful):
वैज्ञानिकों का कहना है कि Psittacosauras भोजन की तलाश में मध्य एशिया तक चले आये थे, आज जहाँ उनके जीवाश्म बड़ी संख्या में पाये जा रहे हैं।
ऐसे जीवों में प्राय: अजीब अंग होते हैं, जैसे बड़े सींग और साही की तरह खड़े बाल।
अध्ययन के प्रमुख Sereno का कहना है कि Psittacosaurs की अनूठी भोजन विधि ही उस कठिन समय में उनकी विजय को स्पष्ट करती है।
इसी कारण ऐसे जीव जिन्हें अपने प्रकृतिक आवास का संरक्षण प्राप्त होता है, जैसा कि इस मामले में है, ऐसा भोजन करना जिसे कोई और नहीं खाता है, भोजन स्रोतों को बढ़ाता है और नयी-नयी प्रजातियों में शाखान्वित होने को बढ़ावा देता है।
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Story by विनय प्रजापति
Tags: Cretaceous, Dinosaur, Parrot, Psittacosaurs, Psittacosaurus gobiensis, अखरोट, क्रेटेसियस, गोबी, चिड़ियाँ, जीवाश्म, तोता




बढियां आलेख ! शुक्रिया !
बहुत सुंदर जानकारी.
धन्यवाद
पर मुझे तो इनकी खोपडी भी अखरोट की तरह लग रही है।
ह ह हा।
खास प्रकार डायनासोर के बारे में इतनी अच्छी जानकारी देने का शुक्रिया।
बढियां आलेख ! शुक्रिया !1
कहीं ऎसा तो नहीं कि जैसे इन्सान के पूर्वज बन्दर थे, उसी प्रकार से तोते के पूर्वज ये डायनासोर हों…
Bahut hi rochak. .
bahut hi rochak jankari……….thank you
रोचक जानकारी के लिए आभार।
बढियां जानकारी .
डायनासोर जैसे जीव के बारे में इस तरह की जानकारियाँ विस्मित भी करतीं हैं, और रुचि भी जगाती हैं उस कालावधि के अध्ययन आदि के लिये । आपका आभार ।